CHROMOSOMAL DISORDERS क्रोमोसोमल विकार in hindi

 CHROMOSOMAL DISORDERS :-

 

टर्नर्स सिंड्रोम ( TURNER'S SYNDROME ) :–

 जब मनुष्य के द्विगुणित क्रोमोसोम में से एक की कमी हो जाती है तो यह सिंड्रोम उत्पन्न होता है । इस प्रकार यह - मोनोसोमी (2n -1) का उदाहरण है । इसमें मानव शरीर में क्रोमोसोम की संख्या 45 रह जाती है । यह संलक्षण नारियों में पाया जाता है । इस संलक्षण में नारियों के अंडाशय (ovary) अपरिपक्व (immature) होते हैं तथा इनमें द्वितीयक लैंगिक लक्षणों (secondary sexual characters) का अभाव रहता है । ऐसी स्त्रियाँ बाँझ होती हैं यानि बच्चे पैदा करने की क्षमता इनमें नहीं रहती है

 

डाउन्स सिंड्रोम ( DOWN'S SYNDROME ) :-

जब मनुष्य के 21 वीं जोड़े के क्रोमोसोम में एक क्रोमोसोम की वृद्धि हो जाती है तो डाउन संलक्षण , या डाउन्स सिंड्रोम नामक बीमारी बच्चों में उत्पन्न होती है । इस प्रकार यह ट्राइसोमी ( 2n +1 ) का उदाहरण है । इस प्रकार के रोगी की हर कोशिका में 47 क्रोमोसोम पाए जाते हैं । हालाँकि मानव कोशिका का 21 वाँ क्रोमोसोम सबसे छोटा होता है , लेकिन इसकी संख्या में एक की वृद्धि होने के चलते रोगी का कद छोटा, सिर गोल, जीभ मोटा एवं मुँह आंशिक तौर पर खुला रहता है । ऐसे रोगी मंदबुद्धि होते हैं तथा श्वास संबंधी संक्रमण इनमें आसानी से हो जाता है । इनकी हथेली असामान्य रहती है एवं इनके हृदय में दोष रहता है । लैंगडन डाउन (Langdon Down) ने 1866 में इस विकार की खोज की , इसलिए इसे डाउन संलक्षण कहा जाता है । इस रोग से प्रसित बच्चे देखने में मंगोलियन (mongolian race) के समान लगते हैं , इसलिए इसे मंगोलियन संलक्षण भी कहते हैं । सामान्यतः ऐसे बच्चे 8 से 12 वर्ष की उम्र तक ही जीवित रहते है

 

क्लाइनफेल्टर्स सिंड्रोम ( KLINEFELTER'S SYNDROME ) :

यह भी ट्राइसोमी का एक उदाहरण है , लेकिन इसमें लिंग-क्रोमोसोम X की एक अतिरिक्त प्रतिलिपि के मौजूद रहने के चलते मानव कोशिका में 47 क्रोमोसोम (44+ XXY) हो जाता है । यह संलक्षण पुरुषों में पाया जाता है जो देखने में सामान्य लगते हैं , लेकिन इनमें मादा लक्षण परिलक्षित होते हैं , जैसे स्त्री की भाँति वक्ष की वृद्धि । ऐसे पुरुष प्रायः बाँझ होते हैं ,  क्योंकि इनमें शुक्राणु बहुत कम बन पाते हैं


BY :- A. KUMAR 


 

 

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