मानव का उद्भव और विकास

 मानव का उद्भव और विकास 

लगभग 15 मिलियन वर्ष पूर्व ड्रायपिथिकस तथा रामापिथिकस नामक नरवानर विद्यमान थे । इन लोगों के शरीर वालों से भरपूर थे तथा गोरिल्ला एवं चिपैंजी जैसे चलते थे । रामापिथक अधिक मनुष्यों जैसे थे जबकि ड्रायोपिथिकस वनमानुष (ऐप) जैसे थे । इथोपिया तथा तंजानिया (चित्र 6.11) में कुछ जीवाश्म (फासिल) अस्थियाँ मानवों जैसी प्राप्त हुई हैं । ये जीवाश्म मानवी विशिष्टताएँ दर्शाते हैं जो इस विश्वास को आगे बढ़ाती हैं कि 3-4 मिलियन वर्ष पूर्व मानव जैसे नर वानर गण (प्राइमेट्स) पूर्वी अफ्रीका में विचरण करते रहे थे । ये लोग संभवतः ऊँचाई में 4 फुट से बड़े नहीं थे; किंतु वे खड़े होकर सीधे चलते थे । 

लगभग 2 मिलियन वर्ष पूर्व ओस्ट्रालोपिथेसिन (आदिमानव) संभवतः पूर्वी अफ्रीका के घास स्थलों में रहता था । साक्ष्य यह प्रकट करते हैं कि वे प्रारंभ में पत्थर के हथियारों से शिकार करते थे, किंतु प्रारंभ में फलों का ही भोजन करते थे । खोजी गई अस्थियों में से कुछ अस्थियाँ बहुत ही भिन्न थीं। इस जीव को पहला मानव जैसे प्राणी के रूप में जाना गया और उसे होमो हैबिलिस कहा गया था । उसकी दिमागी क्षमता 650-800 साँसो के बीच थी । वे संभवतः माँस नहीं खाते थे 1991 में जावा में खोजे गए जीवाश्म ने अगले चरण के बारे में भेद प्रकट किया । यह चरण था होमो इरेक्टस जो 1.5 मिलियन वर्ष पूर्व हुआ। होमो इरेक्टस का मस्तिष्क बड़ा था जो लगभग 900 सीसी का था । होमो इरैक्टस संभवतः माँस खाता था। नियंडरटाल मानव 1400 सीसी आकार वाले मस्तिष्क लिए हुए, 100,000 से 40,000 वर्ष पूर्व लगभग पूर्वी एवं मध्य एशियाई देशों में रहते थे । वे अपने शरीर की रक्षा के लिए खालों का इस्तेमाल करते थे और अपने मृतकों को जमीन में गाड़ते थे। होमो सैपियंस (मानव) अफ्रीका में विकसित हुआ और धीरे-धीरे महाद्वीपों से पार पहुँचा था तथा विभिन्न महाद्वीपों में फैला था. इसके बाद वह भिन्न जातियों में विकसित हुआ। 75,000 से 10,000 वर्ष के दौरान हिमयुग में यह आधुनिक युगीन मानव पैदा हुआ। मानव ने प्रागैतिहासिक गुफा चित्रों की रचना लगभग 18,000 वर्ष पूर्व हुई कृषि कार्य लगभग 10,000 वर्ष पूर्व आरंभ हुआ और मानव बस्तियाँ बनना शुरू हुई। बाकी जो कुछ हुआ वह मानव इतिहास या वृद्धि का भाग और सभ्यता की प्रगति का हिस्सा है






BY :- A. KUMAR .









Comments

Popular posts from this blog

MENSTRUAL CYCLE & MENSTRUAL DISORDER