ORIGIN OF LIFE , जीवन की उत्पत्ति
ORIGIN OF LIFE :-
जीवन ब्रह्मांड का हिस्सा है और दोनों एक साथ एक दूसरे से जुड़े हुए हैं हम
जानते हैं कि जीवन अणुओं का सबसे अनूठा जटिल संगठन है जो रासायनिक प्रतिक्रियाओं
के माध्यम से खुद को अभिव्यक्त करता है । जो विकास ,जवाबदेही , अनुकूलन और प्रजनन का
कारण बनता है जो कि हमारे ब्रह्मांड में प्राप्त हुआ है जीवन की उत्पत्ति
ब्रह्मांड के इतिहास की एक अनोखी घटना है ।
1. ANCIENT THEORIES OF ORIGIN OF LIFE :-
A. Theory of
special creation :-
A/C
to Spanish priest father Saurez ( 1548 - 1617 BC ) , the whole universe was
created in six days by the god
1st days : - Earth and
Heaven
2nd days : - sky
3rd days :- land and vegetation
4th days :- sun
,moon , and other palnet
5th days :- fishes and birds
6th days :- human and other animal .
This theory was based
on some supernatural power .
B. THEORY OF
SPONTANEOUS GENERATION OR ABIOGENESIS :-
इस मत के अनुसार अधिकांश जंतुओं की उत्पत्ति स्वतः अजीवी
पदार्थों से होती है। मिस्रवासियों का विश्वास था कि नील नदी के कीचड़ सूखने के
पश्चात मछली, मेढक, साँप, घड़ियाल इत्यादि जीवित
जंतु अपने-आप पैदा हो जाते है ।
C. COSMOZOIC THEORY
:-
आरहेनियस (Arbenius) ने 1903 में कहा था कि जीव की उत्पत्ति हुई नहीं, वरन पदार्थों ( (matter) की भाँति वे भी इस ग्रह पर हमेशा से विद्यमान रहे है । किंतु हम यह जानते हैं कि तत्त्व (elements) ही इस पृथ्वी पर हमेशा से नहीं रहा है, तो फिर जीव हमेशा से कैसे विद्यमान रह सकता है । उनकी दूसरी परिकल्पना के अनुसार जीव की उत्पत्ति अन्य ग्रहों पर हुई और वहाँ से वे पृथ्वी पर स्थानांतरित हुए। यह मत मान्यता नहीं पाई ।
D. THEORY OF
CATASTROPISM OR THEORY OF SUDDEN CREATION FROM INORGANIC MATERIAL :-
Cuvier ( 1769 - 1832 )
ने तबाही में विश्वास
किया। उनके अनुसार, प्रलय पृथ्वी पर पुरे
जीवन को नष्ट कर देती है । और उसके बाद नया जीवन
यंत्रवत सिद्धांत के रूप में उत्पन्न करता है ।
2. MODERN THEORY, OPARION THEORY,
CHEMICAL THEORY, NATURALISTIC THEORY , MATERIALISTIC THEORY : -
A. NATURALISTIC THEORY ( प्रकृतिवादी सिद्धांत ) :-
इस सिद्धांत के प्रवर्तको का कहना है कि आदिसमुद्र में जीव
अनुकूल वातावरण में स्वतः उत्पन हुआ । उस समय समुद्रों में अन्य पदार्थों के अतिरिक्त प्रचुर मात्रा में अनेक
कार्बनिक (organic) पदार्थ भी उपस्थित थे, जो जीवों में भी पाए जाते हैं । अधिकाश आधुनिक वैज्ञानिक इस सिद्धांत से काफी सहमत है।
B.
CHARLES
DARWIN'S THEORY :-
1858 में चार्ल्स डार्विन ने
कहा था कि जीवन-उत्पत्ति के समय वर्तमान युग से स्थितियों बिल्कुल भिन्न थी । उनका अनुमान था कि ऐमीनो अम्ल (amino acids) जीव के शरीर के बाहर मौजूद था। उन्होंने
फॉस्फेट (phosphate) एवं अमोनिया (ammonia) का ताप एवं प्रकाश के प्रभाव में संयोजन कर
प्रोटीन संश्लेषण किया। उन्होंने यह भी कहा कि अब यह संभव है कि ये पदार्थ जीव के
बाहर रह सकें, क्योंकि सूक्ष्मजीव इनको
शीघ्र ही नष्ट कर देंगे ।
C.
HALDANE'S
THEORY :-
A. OPARION CONCEPTION :-
प्रसिद्ध रूसी जीवरसायनवैज्ञानिक ए० आइ० ओपैरिन (AI Oparin) ने 1938 में अपनी पुस्तक The Origin of Life में सर्वप्रथम बहुत ही सशक्त एवं सुस्पष्ट परिकल्पना जीवन
की उत्पत्ति पर प्रस्तुत की । उन्होंने कहा कि आदिसमुद्रों में जीवन की उत्पत्ति के पूर्व अनेक कार्बनिक
यौगिक उपस्थित थे । इन कार्बनिक यौगिकों ने
आपस में अभिक्रिया कर अधिकाधिक जटिल रचनाओं का निर्माण किया । इसके फलस्वरूप एक ऐसी रचना का निर्माण हुआ, जिसे हम 'जीव' कह सकते हैं । ओपैरिन का विश्वास है कि जीव का संश्लेषण धीरे-धीरे अजीवी
पदार्थों से तर्कसंगत एवं संभावित चरणों में स्वतः हुआ । आदि कार्बनिक यौगिक के संश्लेषण में ऊर्जा पराबैगनी
प्रकाश विद्युत विसर्जन, ज्वालामुख के ताप एवं कुछ
सीमा तक रेडियोसक्रियता (radioactivity) के द्वारा प्राप्त हुई । इनका मत है कि बहुत ही आरंभिक जीव में बहुत ही कम
जीवसंश्लेषण (biosynthesis) की क्षमता थी ।
CHEMICAL EVOLUTION :-
आदिपरिस्थितियों में कम-से-कम छह प्रकार के कार्बनिक यौगिकों का संश्लेषण हुआ
होगा जो जीवन के आधार बने। अतएव इनको पूर्वजीवी यौगिक कहते हैं । ये कार्बनिक यौगिक अग्रलिखित हैं ।
Sugar Amino
acid
Glycerol Purines
Fatty acid Pyrinidines
BY :- A. KUMAR.
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