डार्विनवाद

 डार्विनवाद  

चार्ल्स डार्विन का जन्म सन् 1809 में हुआ था। वे एक धनी चिकित्सक पीढ़ी में पी पुत्र थे । सन् 1831 में डार्विन एच०एम० एम०. बीगल ( H.M.S. Beagle )  जिनका अनु नामक जहाज पर अवैतनिक प्रकृतिविद् बनकर यात्रा पर गये । इस विशेष यात्रा का मुख्य उद्देश्य गैलापैगों द्वीप समूह का सर्वेक्षण तथा वहाँ के वन्य प्राणियों का अध्ययन करना था

चार्ल्स राबर्ट डार्विन ने बताया की जब कोई जीवधारी किसी विशेष क्षेत्र में रहता है तब उस क्षेत्र के पर्यावरण के साथ अपने को व्यवस्थित करने का प्रयास करता है । इस प्रयास के कारण उसके शारीरिक अंगों, आदतों और व्यवहार में परिवर्तन आ जाते हैं । परिवर्तन की इस अवस्था को अनुकूलन कहते है। डार्विन के अनुसार किसी भी जीवधारी की संताने जब अपने पैतृक क्षेत्र को F1  9 छोड़कर किसी नये क्षेत्र में चली जाती है और वहीं पर स्थायी रूप से निवास करने लगती है तब अनुकुलनों के कारण उनमें इतने अधिक परिवर्तन हो जाते है कि वे अपने पूर्वजों से भिन्न होकर एक नई जाति के जीवधारियों के रूप में प्रकट होती है

 इस सर्वेक्षण के दौरान उनके कुछ निरीक्षण इस प्रकार है :-

 (i) रीआ ( शुतुरमुर्ग की तरह का पक्षी) जो दक्षिण अमेरिका में पाये जाते हैं, दक्षिणी अमेरिका के ही सभी स्थानों पर समरूप नहीं थे

(ii) आमार्डिलो के कुछ जीवाश्म जो उन्होंने ढूंढे, आज के आमडिलों से आकृति में काफी बड़े थे, लेकिन रचना में एक जैसा प्रतीत होते थे

(iii) गैलापैगो द्वीपों एवं दक्षिणी अमेरिका के मुख्य स्थल का वातावरण एक जैसा होते हुए भी दोनों स्थानों के प्राणी एवं पौधे एक जैसे नहीं थे


BY :- A. KUMAR .

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